मानसून ऋतु 2026 की औसत वर्षा का संक्रियात्मक दीर्घकालिक पूर्वानुमान – Long Range Monsoon Forecast 2026 in Hindi
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पुरे देश के लिए दक्षिण- पश्चिम मानसून ऋतु (जून- सितम्बर ) की औसत वर्षा का संक्रियात्मक दीर्घकालिक पूर्वानुमान (LRF) दो चरणों में जारी करता आ रहा है। पहले चरण का पूर्वानुमान अप्रैल में और दूसरे चरण या अद्यतन पूर्वानुमान मई के अंत तक जारी किया जाता है।
13 अप्रैल 2026 को, IMD ने वर्ष 2026 के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की मौसमी वर्षा के लिए पहले चरण का LRF (दीर्घकालिक पूर्वानुमान) जारी किया। LRF प्राप्त करने के लिए डायनामिकल (Dynamical) और सांख्यिकीय (Statistical) मॉडलों का उपयोग किया जाता है।
LRF की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1) मानसून की वर्षा, दीर्घकालिक औसत (LPA) का 92% होने की संभावना है, जिसमें ± 5% की मॉडल त्रुटि हो सकती है।
2) वर्षा की विभिन्न श्रेणियों के लिए पूर्वानुमान और जलवायु-संबंधी संभावनाएँ नीचे दी गई हैं।
| श्रेणी | वर्षा की सीमा ( दिर्घावधि औसत ) | पूर्वानुमान संभाव्यता (%) | जलवायुसंबधी संभावना (%) |
| कम | < 90 | 35 | 16 |
| सामान्य से नीचे | 90-95 | 31 | 17 |
| सामान्य | 96-104 | 27 | 33 |
| सामान्य से अधिक | 105-110 | 6 | 16 |
| अत्यधिक | >110 | 1 | 17 |
3) स्थानिक वितरण के अनुमान के अनुसार देश के कई हिस्सों में मौसमी वर्षा सामान्य से कम होने की सबसे अधिक संभावना है; लेकिन पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिमी और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।
वैश्विक प्राचल (Global Parameters)
A) भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में कमज़ोर ला-नीना स्थितियाँ ENSO-तटस्थ स्थितियों में बदल रही हैं, और अप्रैल से जून 2026 के मौसम के दौरान इनके जारी रहने की संभावना है।
B) वर्तमान तटस्थ IOD स्थितियों के दक्षिण-पश्चिम मानसून मौसम के अंत तक सकारात्मक IOD में विकसित होने की संभावना है।
C) जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध में बर्फ़ की चादर का विस्तार सामान्य से थोड़ा कम था।
प्रभाव
I) कमज़ोर ला नीना / अल नीनो – भारत में मॉनसून के लिए अनुकूल नहीं।
II) सकारात्मक IOD – भारत में मॉनसून के लिए अनुकूल।
III) उत्तरी गोलार्ध में बर्फ़ की चादर का, उसके बाद के मौसम में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वर्षा के साथ विपरीत संबंध होता है।
